भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) विदेशी बैंकों को देश के बैंकों में बड़ी हिस्सेदारी देने पर विचार कर रहा है। इस बारे में आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने साफ कहा है कि केंद्रीय बैंक यह जांच करेगा कि क्या विदेशी बैंकों को नीतिगत तौर पर भारतीय बैंकों में 26 फीसदी हिस्सेदारी रखने की इजाजत दी जा सकती है।
अभी क्या है नियम?
मौजूदा एफडीआई (FDI) नीति के हिसाब से विदेशी निवेशकों को 74% तक हिस्सेदारी रखने की अनुमति है, लेकिन मतदान का अधिकार 26% से ज्यादा नहीं हो सकता। मतलब ये कि शेयर तो खरीदे जा सकते हैं, लेकिन फैसलों में दखल सीमित रहेगा।
RBI गवर्नर ने क्या कहा?
एक इंटरव्यू में गवर्नर मल्होत्रा ने बताया कि फिलहाल कोई भी विदेशी बैंक 26% हिस्सेदारी के लिए आगे नहीं आया है, लेकिन अगर भविष्य में कोई ऐसा करता है, तो RBI पहले से ही इस नीति पर विचार कर रहा है।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि कुछ कॉरपोरेट ग्रुप्स के पास अच्छा पैसा है और बैंकिंग सेक्टर को निवेश की जरूरत है, फिर चाहे वो नए बैंक हों या पहले से चल रहे।

क्यों अहम है ये बयान?
यह बयान ऐसे समय आया है जब यस बैंक और आरबीएल बैंक जैसे निजी बैंकों में विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी दिखी है। फिलहाल RBI ऐसी बड़ी हिस्सेदारी सिर्फ संकट में चल रहे बैंकों के अधिग्रहण के समय ही मंजूरी देता है। लेकिन अब लगता है कि RBI इस नीति को थोड़ा और लचीला बनाने की सोच रहा है।
विनिर्माण और सेवा सेक्टर पर RBI का सर्वे शुरू
इसी के साथ RBI ने भारतीय विनिर्माण उद्योग की स्थिति जानने के लिए तिमाही औद्योगिक परिदृश्य सर्वेक्षण शुरू किया है। साथ ही सेवा और बुनियादी ढांचा क्षेत्र से जुड़ा 46वां तिमाही सर्वेक्षण भी चालू कर दिया गया है। इसका मकसद है बिजनेस सेंटिमेंट यानी कारोबारी धारणा को समझना।


