सोमवार को दिल्ली के सर्राफा बाजार में चांदी की कीमतों में ज़ोरदार उछाल देखने को मिला। चांदी ₹5,000 बढ़कर ₹1,15,000 प्रति किलो पर पहुंच गई, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। लेकिन इसके बावजूद जानकार मानते हैं कि चांदी आज भी सोने के मुकाबले सस्ती है।

चांदी और सोने का फर्क
अगर चांदी और सोने की तुलना करें, तो आज एक औंस सोना खरीदने के लिए करीब 86 औंस चांदी की जरूरत पड़ती है। जबकि पिछले 10 सालों का औसत 80 औंस रहा है। यानी चांदी ने अच्छा रिटर्न दिया है, फिर भी यह सोने से सस्ती बनी हुई है।
चांदी की तेजी के पीछे की वजह
चांदी की कीमतें सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में बढ़ी हैं। इंटरनेशनल मार्केट में भी चांदी करीब 14 साल के सबसे ऊंचे स्तर पर है। इसका एक बड़ा कारण यह है कि बहुत सारे निवेशक अब सोने की बजाय चांदी में पैसा लगा रहे हैं।
इसके अलावा रूस-यूक्रेन युद्ध की चिंता, वैश्विक बाजार में अनिश्चितता और चांदी के ETF (Exchange Traded Funds) में बढ़ती खरीदारी भी कीमतों को ऊपर ले जा रही है।
डॉलर का असर भी पड़ा
जब अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है तो चांदी की कीमतों पर असर पड़ता है। हाल ही में डॉलर की मजबूती के चलते चांदी की कीमत में थोड़ी गिरावट (0.8%) भी देखी गई थी। क्योंकि चांदी की कीमतें डॉलर में तय होती हैं, तो विदेशी निवेशकों के लिए यह महंगी हो जाती है।

चांदी की कमी और बढ़ती मांग
दुनियाभर में चांदी की सप्लाई कम हो रही है और मांग बढ़ती जा रही है। खासकर औद्योगिक कामों में, जैसे सोलर पैनल बनाने में चांदी की खपत बहुत ज्यादा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक चांदी की मांग लगातार पांचवे साल उसकी सप्लाई से ज्यादा है।
मेक्सिको पर टैरिफ का असर
मेक्सिको दुनिया का सबसे बड़ा चांदी उत्पादक देश है। हाल ही में अमेरिका ने टैरिफ लगाने की बात कही थी, जिससे चिंता और बढ़ गई। अगर चांदी पर कोई आयात शुल्क लगता है तो यह फिर से महंगी हो सकती है।
इस साल चांदी बना निवेश का स्टार
2025 में अब तक चांदी की कीमतों में 32% तक उछाल आ चुका है, जबकि सोना करीब 27% ही चढ़ा है। यानी इस साल चांदी ने सोने से बेहतर रिटर्न दिया है।
ताजा रेट
न्यूयॉर्क में चांदी का भाव 0.5% गिरकर $38.23 प्रति औंस हो गया है। वहीं, सोना, पैलेडियम और प्लैटिनम की कीमतों में भी गिरावट देखी गई। डॉलर इंडेक्स इस दौरान 0.2% बढ़ा है।
चांदी की कीमतें भले ही रिकॉर्ड तोड़ रही हैं, लेकिन सोने के मुकाबले अब भी सस्ती मानी जा रही है। निवेश के लिहाज से देखा जाए तो चांदी एक अच्छा विकल्प बनती जा रही है, खासकर तब जब इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।


