देश के आम लोगों को आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत मिल सकती है। सरकार की तरफ से संकेत दिए गए हैं कि अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक 65 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रहती हैं, तो आने वाले 2-3 महीनों में पेट्रोल-डीजल सस्ता हो सकता है।
एक कार्यक्रम में ऊर्जा मंत्रालय की तरफ से कहा गया कि अगर बाजार में हालात स्थिर रहते हैं और कोई बड़ा अंतरराष्ट्रीय संकट (जैसे युद्ध या भू-राजनीतिक तनाव) नहीं होता, तो तेल कंपनियां कीमतें कम कर सकती हैं। इस समय कच्चे तेल की कीमतें 65 डॉलर के पास हैं, जिससे कंपनियों को अच्छा मुनाफा हो रहा है।
कंपनियों को हर लीटर पर मोटा मुनाफा
फिलहाल, तेल कंपनियों को पेट्रोल पर प्रति लीटर ₹12 से ₹15 और डीजल पर करीब ₹6 का मुनाफा हो रहा है। इसके बावजूद, पिछले एक साल से कीमतों में कोई कमी नहीं की गई है। अप्रैल महीने में केंद्र सरकार ने एक्साइज ड्यूटी ₹2 प्रति लीटर बढ़ा दी थी, जिससे कंपनियों को कीमत घटाने का बहाना मिल गया।
टैक्स से बनी रहती है कीमत ऊंची

इस समय पेट्रोल पर केंद्र सरकार करीब ₹22 और दिल्ली सरकार ₹15 से ज्यादा टैक्स ले रही है। इसी तरह, डीजल पर भी कुल टैक्स ₹30 से ज्यादा है। इसका सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ता है। आंकड़ों के मुताबिक, एक औसत व्यक्ति हर महीने पेट्रोल और डीजल पर करीब ₹298 टैक्स चुका रहा है।
कहां सबसे महंगा है पेट्रोल?
देश में फिलहाल सबसे महंगा पेट्रोल आंध्र प्रदेश में मिल रहा है, जहां एक लीटर की कीमत ₹108 है। इसके बाद केरल, मध्य प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में भी दाम ₹105 से ऊपर हैं। डीजल की कीमत भी कई राज्यों में ₹95 के पार पहुंच गई है।
पेट्रोल-डीजल की खपत हर साल बढ़ रही
भारत में हर साल पेट्रोल की खपत लगभग 4,750 करोड़ लीटर और डीजल की खपत 10,700 करोड़ लीटर के करीब है। इसका मतलब है कि एक आम नागरिक हर महीने करीब 9 लीटर ईंधन इस्तेमाल करता है। यह खपत हर साल औसतन 10% से ज्यादा बढ़ रही है।


