दूध की थैलियों से होने वाले प्लास्टिक कचरे की समस्या का अब मिल गया है बेहतरीन समाधान। अब ऐसा पैकेट तैयार किया गया है जो दूध भी सुरक्षित रखता है और पर्यावरण को नुकसान भी नहीं पहुंचाता।
दरअसल, बेंगलुरु में एक नई शुरुआत की गई है जिसमें दूध को अब प्लास्टिक की बजाय ऐसे पैकेट में पैक किया जा रहा है जो सिर्फ 90 दिनों में जैविक खाद में बदल जाता है। ये पैकेट पूरी तरह इको-फ्रेंडली हैं और इन्हें मकई के स्टार्च, गन्ने और अन्य पौधों से तैयार किया गया है।

कैसे है ये पैकेट खास?
जहां एक ओर प्लास्टिक की थैलियों को सड़ने में 500 साल तक लग जाते हैं, वहीं ये नए पैकेट महज 3 महीने में मिट्टी में मिलकर जैविक खाद बना देते हैं। यह पहल न सिर्फ पर्यावरण के लिए फायदेमंद है, बल्कि आने वाले समय में पूरे देश की दूध इंडस्ट्री को बदल सकती है।
उपभोक्ता भी खुश, लीकेज की नहीं कोई शिकायत
इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत अब तक कोई लीकेज की शिकायत नहीं मिली है। दूध की गुणवत्ता भी पहले जैसी बनी रही है, और लोग इस बदलाव से काफी संतुष्ट नजर आए हैं।
हर दिन लाखों प्लास्टिक पैकेट का होता है इस्तेमाल
एक अनुमान के मुताबिक, रोज़ाना करीब 20 से 25 लाख प्लास्टिक पैकेट का इस्तेमाल होता है, जिससे हर साल करीब 15,000 मीट्रिक टन प्लास्टिक कचरा इकट्ठा होता है। इसे रिसाइकिल करना भी एक बड़ा खर्च और चुनौती है।

अगर ये प्रयोग सफल रहा, तो जल्द ही देशभर में दूध की थैलियों की जगह ये इको-फ्रेंडली पैकेट नजर आ सकते हैं — जो न सिर्फ दूध देंगे, बल्कि मिट्टी को भी उपजाऊ बनाएंगे।
(सारी जानकारी नवभारत टाइम्स बिजनेस न्यूज से ली गई हैं ।)


