तनाव, डिप्रेशन और आत्महत्या जैसी समस्याओं के खिलाफ एक पॉजिटिव पहल
झारखंड के गांवों और शहरों में पिछले 26 महीनों से एक ऐसा अभियान चल रहा है, जो लोगों को सकारात्मक सोच और खुशी से जीने की राह दिखा रहा है। इस अभियान का नाम है – खुशी मिशन।
अब तक ये मिशन 560 गांवों में खुशी चौपाल और 503 स्कूल-कॉलेजों में खुशी क्लास के जरिए हजारों लोगों तक पहुंच चुका है। इस अभियान का मकसद है – तनाव, हाइपरटेंशन, डिप्रेशन और आत्महत्या की प्रवृत्ति से लड़ना, और लोगों को यह समझाना कि “खुशी ही असली दवा है।”

क्या है खुशी मिशन?
खुशी मिशन की शुरुआत मुकेश सिंह चौहान ने की, जो खुद एक पत्रकार रह चुके हैं। उन्होंने बताया कि यह मिशन उनके 15 साल के अनुभव और समाज में बढ़ते तनाव को देखकर शुरू हुआ। पहले वे स्कूल-कॉलेजों में बच्चों को ‘खुशी क्लास’ के ज़रिए मोटिवेट करते थे। फिर उन्होंने ठाना कि अब तो हर गांव, हर गली में खुशी फैलानी होगी।
इसी सोच से 27 मई 2023 को खुशी रथ की शुरुआत हुई। यह रथ गांव-गांव घूमता है, वहां खुशी चौपाल लगाई जाती है और लोगों से दिल से बात होती है — बिना किसी फीस के, बिना किसी फायदे के।
मिशन की खास बातें
खुशी रथ अब तक झारखंड के 17 जिलों के 560 गांवों में पहुंच चुका है।
स्कूल-कॉलेजों में 503 से ज्यादा ‘खुशी क्लास’ हो चुके हैं।
खुशी चौपाल में लोग अपने दिल की बात खुलकर कहते हैं, और बदले में उन्हें सकारात्मक सोच, प्रेरणादायक कहानियां और आत्मबल मिलता है।

रथ के साथ ‘खुशी लाइब्रेरी’ भी चलती है, जहां मुफ्त में प्रेरणादायक किताबें दी जाती हैं और जरूरतमंदों तक पहुंचाई जाती हैं।
कैसे बदली एक जिंदगी ने सोच?
खुद मुकेश सिंह चौहान की जिंदगी एक समय डिप्रेशन में थी। दवाइयों पर निर्भर थे। लेकिन एक दिन उन्होंने देखा कि एक विकलांग व्यक्ति बिना किसी मदद के सीढ़ियां चढ़ रहा है। उसी क्षण उन्हें समझ आया कि जब वो लड़ सकता है, तो मैं क्यों नहीं?
उस दिन के बाद उन्होंने सारी दवाइयां छोड़ दीं और खुशी को जीने का तरीका बना लिया। उन्होंने जाना कि सकारात्मकता ही वो बीज है, जिससे खुशी पैदा होती है।
क्यों जरूरी है यह मिशन?
आज समाज में छोटी-छोटी बातों पर आत्महत्या हो रही है। चाहे पढ़ाई का प्रेशर हो, रिश्तों का तनाव हो या समाज का डर — हर कोई कहीं ना कहीं भीतर से टूटा हुआ है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक झारखंड में हर 14 में से एक व्यक्ति डिप्रेशन का शिकार है।
सिर्फ गुमला जिले में 5 महीने में 57 आत्महत्या के मामले सामने आए हैं।
खुशी मिशन का उद्देश्य यही है कि लोगों को यह बताया जाए कि समस्या कितनी भी बड़ी हो, सोच अगर पॉजिटिव होगी तो रास्ता निकल ही आएगा।
कैसे जुड़ें मिशन से?

जहां-जहां खुशी रथ जाता है, वहां लोगों को खुशी दूत बनने के लिए प्रेरित किया जाता है।
उनसे बस इतना वादा लिया जाता है — “परिस्थिति जैसी भी हो, हम मुस्कुराएंगे, पॉजिटिव रहेंगे और अपने आसपास भी यही माहौल बनाएंगे।”
कोई भी व्यक्ति अपने घर और आसपास के 2 घरों में सकारात्मक माहौल बनाए, तो समाज बदलने में देर नहीं लगेगी।
जात-पात से ऊपर, इंसानियत के नाम
खुशी मिशन जाति, धर्म या समुदाय से ऊपर उठकर एक खुशी परिवार बनाने का काम कर रहा है — जहां हर कोई एक-दूसरे की ताकत बने।


