भारत अब सेमीकंडक्टर (चिप) बनाने के मामले में तेजी से आगे बढ़ रहा है। आने वाले 5 सालों में देश का सेमीकंडक्टर कारोबार 100 से 110 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। अभी यह 45-50 अरब डॉलर के आसपास है। मतलब आने वाले समय में भारत इस सेक्टर में बड़ा खिलाड़ी बन सकता है।
सेमीकंडक्टर का इस्तेमाल मोबाइल, कंप्यूटर, गाड़ी, टीवी, वॉशिंग मशीन जैसी चीजों में होता है। जैसे-जैसे इन चीजों की मांग बढ़ रही है, वैसे-वैसे चिप की जरूरत भी बढ़ रही है।

कोरोना काल ने चिप की अहमियत बताईकोरोना के समय जब दुनिया में चिप की कमी हो गई थी, तब सबको समझ आया कि चिप बनाना कितना जरूरी है। तभी से कई देश, खासकर भारत, इस पर काम करने लगे हैं ताकि आगे कभी कमी न हो।
भारत बन सकता है ग्लोबल चिप हबभारत अब अमेरिका, यूरोप और कोरिया जैसे देशों के साथ मिलकर चिप की सप्लाई चेन में बड़ी भूमिका निभा सकता है। हमारे यहां जमीन, काम करने वाले लोग और सरकार की मदद मिलना बाकी देशों के मुकाबले आसान है।

दुनिया का चिप बाजार भी तेजी से बढ़ेगासिर्फ भारत ही नहीं, पूरी दुनिया में सेमीकंडक्टर का बाजार 2030 तक 1 लाख करोड़ डॉलर से ज्यादा का हो सकता है। मोबाइल, टीवी, इलेक्ट्रिक कार, हेल्थ मशीन, स्मार्ट डिवाइस जैसी चीजें इस ग्रोथ में बड़ा रोल निभाएंगी।
चित्र साभार: गूगल से

