साल 1903। जगह – बॉम्बे (आज का मुंबई)। अरब सागर के किनारे एक शानदार इमारत खड़ी हुई – नाम था ताजमहल पैलेस होटल।लेकिन ये होटल सिर्फ एक इमारत नहीं थी। इसके पीछे छुपी थी जमशेदजी टाटा की ज़िद, उनका जुनून और एक तरह से बदले की आग।

उन्होंने दुनिया के अलग-अलग देशों से सामान मंगवाया। होटल बनाने में उस वक्त लगभग 26 लाख रुपये खर्च हुए। उस दौर के हिसाब से ये बहुत बड़ी रकम थी।
जब ताज होटल शुरू हुआ, तब एक रूम का किराया सिर्फ 6 रुपये था – और मज़े की बात ये कि तब भी कमरे में एसी (Air Conditioner) जैसी सुविधाएं दी जाती थीं, जो अपने आप में बहुत बड़ी बात थी।
आज ये होटल भारत का पहला 5-स्टार होटल माना जाता है। ये सिर्फ एक बिजनेस आइडिया नहीं था, बल्कि एक भारतीय का सपना था – जिसने अपमान को अवसर में बदला।

चित्र साभार: गूगल से


