IDBI बैंक का जल्द ही निजीकरण होने वाला है। केंद्र सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC), जो IDBI बैंक में बहुमत हिस्सेदारी रखते हैं, अब बैंक की अपनी हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं।
वित्त मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, सरकार IDBI बैंक में अपनी 30.48% हिस्सेदारी और LIC अपनी 30.24% हिस्सेदारी बेचने को तैयार है। इससे कुल मिलाकर लगभग 60% हिस्सेदारी निजी निवेशकों को दी जा सकती है।
सूत्रों का कहना है कि कई घरेलू और विदेशी निवेशकों ने बैंक में रुचि दिखाई है और जल्द ही उनकी बोली की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। निजीकरण के बाद बैंक में नए प्रबंधन के आने की संभावना है, जिससे बैंकिंग सेवाओं में प्रतिस्पर्धा और गुणवत्ता दोनों में सुधार की उम्मीद की जा रही है।
IDBI बैंक का निजीकरण सरकार के उस बड़े मिशन का हिस्सा है, जिसके तहत वह गैर-जरूरी सार्वजनिक उपक्रमों में अपनी हिस्सेदारी बेचकर निजी क्षेत्र को बढ़ावा देना चाहती है।
ग्राहकों पर क्या होगा असर?
सरकार का कहना है कि बैंक के निजीकरण से आम ग्राहकों को कोई नुकसान नहीं होगा। बल्कि सेवाओं की गुणवत्ता और तकनीकी सुधार देखने को मिल सकते हैं।
फिलहाल स्थिति
IDBI बैंक इस समय RBI द्वारा प्राइवेट बैंक की श्रेणी में रखा जा चुका है, हालांकि नियंत्रण सरकार और LIC के हाथ में है। पूरी हिस्सेदारी के ट्रांसफर के बाद ही इसे पूरी तरह निजी बैंक माना जाएगा।



