मोदी सरकार IDBI बैंक के रणनीतिक विनिवेश (Strategic Disinvestment) को अक्टूबर 2025 तक पूरा करने की तैयारी में है। इस प्रक्रिया के पूरा होते ही यह देश की पहली बड़ी सरकारी बैंक निजीकरण डील बन सकती है। इससे भविष्य में अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण का रास्ता भी खुल सकता है।
क्या है सरकार और LIC की हिस्सेदारी?
IDBI बैंक में फिलहाल केंद्र सरकार के पास 30.48% और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के पास 49.24% हिस्सेदारी है। यानी कुल 60.72% शेयर निजी निवेशकों को बेचे जाएंगे। बिक्री पूरी होने के साथ ही सरकार और LIC का नियंत्रण खत्म हो जाएगा और बैंक पूरी तरह निजी क्षेत्र के अंतर्गत आ जाएगा।
SPA ड्राफ्ट पर हुई बैठक
9 जुलाई को इंटर-मिनिस्टीरियल ग्रुप (IMG) की अहम बैठक हुई, जिसमें शेयर पर्चेज एग्रीमेंट (SPA) के मसौदे पर चर्चा की गई। यह ड्राफ्ट डील की शर्तों, प्रबंधन के ट्रांसफर और जरूरी रेगुलेटरी मंजूरियों से जुड़ा हुआ है। अगला कदम अब कोर ग्रुप ऑफ सेक्रेटरीज और वित्त मंत्री की अध्यक्षता वाली समिति के पास प्रस्ताव भेजना है।
कब होगी डील फाइनल?
मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार को उम्मीद है कि अगर प्रक्रिया में कोई रुकावट नहीं आई, तो अक्टूबर 2025 तक IDBI बैंक की बिक्री पूरी कर ली जाएगी। डील फाइनल होने के बाद सरकार और LIC के शेयर तुरंत नए खरीदार को ट्रांसफर कर दिए जाएंगे और उससे मिलने वाली राशि सीधे सरकारी खाते में जमा होगी।
बैंकिंग क्षेत्र में बड़ा बदलाव

IDBI बैंक की इस डील को देश के बैंकिंग सेक्टर में एक बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। आरबीआई पहले ही 2019 में इस बैंक को प्राइवेट सेक्टर बैंक घोषित कर चुका है, लेकिन अब तक इसकी बागडोर सरकार और LIC के हाथों में थी। यह सौदा न केवल IDBI बैंक को पूरी तरह प्राइवेट बनाएगा, बल्कि यह सरकार की बैंकिंग क्षेत्र से हिस्सेदारी घटाने की नीति की दिशा में एक मजबूत कदम भी होगा।


