आईटी सेक्टर की प्रमुख कंपनी HCL टेक्नोलॉजीज ने वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के नतीजे जारी कर दिए हैं। इस तिमाही में कंपनी को ₹3,843 करोड़ का शुद्ध मुनाफा हुआ, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 10% कम है।
कंपनी की कमाई और खर्च का पूरा विवरण
HCL टेक की कुल आय ₹30,805 करोड़ रही, जिसमें से ₹30,349 करोड़ का रेवेन्यू कंपनी ने अपने मुख्य ऑपरेशंस से कमाया। इस अवधि में कुल खर्च ₹25,616 करोड़ रहा और कंपनी ने ₹1,345 करोड़ टैक्स के रूप में चुकाया। इन सभी कटौतियों के बाद नेट प्रॉफिट ₹3,843 करोड़ रहा।
शेयरधारकों को डिविडेंड का तोहफा
कमाई में गिरावट के बावजूद कंपनी ने निवेशकों को निराश नहीं किया है। कंपनी के बोर्ड ने ₹12 प्रति शेयर का अंतरिम डिविडेंड देने की मंजूरी दी है। डिविडेंड का मतलब होता है कि कंपनी अपने मुनाफे का कुछ हिस्सा शेयरधारकों में बांटती है, जो उनके लिए एक अतिरिक्त कमाई का जरिया होता है।
स्टैंडअलोन और कॉन्सोलिडेटेड नतीजों में फर्क क्या होता है?
कंपनियां दो तरह के नतीजे घोषित करती हैं — स्टैंडअलोन और कॉन्सोलिडेटेड। स्टैंडअलोन नतीजे सिर्फ उस एक कंपनी की जानकारी देते हैं, जबकि कॉन्सोलिडेटेड नतीजों में उसकी सब्सिडियरी और अन्य यूनिट्स का संयुक्त प्रदर्शन शामिल होता है।
पिछले एक साल में शेयर का प्रदर्शन
नतीजों से पहले HCL टेक का शेयर 1.51% की गिरावट के साथ ₹1,613.50 पर बंद हुआ।
पिछले 5 दिनों में शेयर ने लगभग 5% का रिटर्न दिया है
1 महीने में इसमें 6% की गिरावट आई
6 महीने में यह 11% टूटा
हालांकि, पिछले एक साल में शेयर अब भी 3% ऊपर है
साल की शुरुआत (1 जनवरी) से अब तक इसमें 16% की गिरावट देखी गई है

HCL टेक कौन चला रहा है?
HCL टेक की स्थापना 1976 में शिव नाडर ने की थी, जो भारतीय टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री के अग्रणी चेहरों में से एक हैं। फिलहाल कंपनी के CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर सी. विजयकुमार हैं। HCL टेक डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, क्लाउड सर्विसेज, इंजीनियरिंग और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट के क्षेत्र में काम करती है।


