खाने-पीने के बाद घरों और होटलों से निकला बेकार तेल अब सिर्फ कचरे में नहीं जाएगा, बल्कि उससे हवाई जहाज़ उड़ान भरेंगे। इंडियन ऑयल (IOC) की पानीपत रिफाइनरी को इंटरनेशनल लेवल पर सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) बनाने की मंजूरी मिल गई है।
IOC के चेयरमैन एस.एम. वैद्य ने बताया कि ये भारत की पहली रिफाइनरी है जिसे ऐसी मान्यता मिली है। इस ईंधन का इस्तेमाल करने से कार्बन उत्सर्जन कम होगा और पर्यावरण को बड़ा फायदा पहुंचेगा।

क्या है खास
हर साल 35,000 टन SAF बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
2027 से 1% SAF मिलाना एयरलाइंस के लिए ज़रूरी होगा।
गुजरात की कच्चाली रिफाइनरी में 5,000 करोड़ रुपये से नया बायो-एनर्जी प्रोजेक्ट शुरू हुआ है।
भारत में अभी हर साल लगभग 3.2 लाख टन एविएशन फ्यूल आयात होता है। SAF बनने से 80–90% तक आयात पर निर्भरता घट सकती है।
पानीपत प्लांट की क्षमता 10,000 टन SAF बनाने की है।
हरे ईंधन की ओर बड़ा कदम
इंडियन ऑयल ने ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट की भी शुरुआत कर दी है। आने वाले समय में SAF और ग्रीन हाइड्रोजन दोनों ही भारत को क्लीन एनर्जी की दिशा में आगे बढ़ाएंगे। इससे न सिर्फ प्रदूषण घटेगा बल्कि विदेशी ईंधन पर खर्च भी कम होगा।

इसका मतलब है कि अब “फेंका हुआ तेल” आसमान की उड़ान का साफ-सुथरा ईंधन बनने जा रहा है।
चित्र साभार: गूगल से


