अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में अपने चुनावी वादों में कहा है कि अगर वे फिर सत्ता में आते हैं, तो विदेशी आयात पर भारी टैरिफ (कर) लगाएंगे। उनका प्लान है कि चीन से आने वाले सामान पर 60% तक और बाकी देशों से आने वाले उत्पादों पर 10% टैरिफ लगाया जाए। अगर यह होता है, तो दुनिया का व्यापार संतुलन बदल सकता है और भारत के लिए यह एक बड़ा मौका बन सकता है।

अमेरिका की इस पॉलिसी से वहां के उद्योगों को तो फायदा होगा, लेकिन कई देशों की निर्यात अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा। ऐसे समय में भारत अपनी मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट क्षमता बढ़ाकर इन खाली जगहों को भर सकता है।
भारत के पास पहले से ही बड़ा श्रमबल, सस्ती लेबर और बढ़ता हुआ टेक सेक्टर है। अगर सरकार सही रणनीति अपनाए और निवेश को बढ़ावा दे, तो 2030 तक भारत दुनिया का मैन्युफैक्चरिंग हब बन सकता है। इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल, ऑटो पार्ट्स और फार्मास्यूटिकल्स जैसे सेक्टर में भारत की पकड़ मजबूत हो सकती है।

इसके लिए जरूरी है कि
मैन्युफैक्चरिंग में निवेश बढ़ाया जाए
इंफ्रास्ट्रक्चर को तेज़ी से विकसित किया जाए
विदेशी कंपनियों के लिए आसान नीतियां बनाई जाएं
नई तकनीक और स्किल ट्रेनिंग पर ध्यान देना
अगर भारत ने इस मौके को सही तरीके से इस्तेमाल किया, तो लाखों रोजगार पैदा हो सकते हैं और हमारी अर्थव्यवस्था तेज़ी से बढ़ सकती है। ट्रंप टैरिफ भारत के लिए एक चुनौती भी है और एक सुनहरा अवसर भी — अब यह हम पर निर्भर है कि हम इसे किस तरह से भुनाते हैं।
चित्र साभार: गूगल से


