आजकल ऑनलाइन फ्लाइट टिकट बुक करते समय ₹249 में एक छोटा सा इंश्योरेंस लेने का ऑप्शन अक्सर नजर आता है। ज्यादातर लोग सोचते हैं – सस्ती है, ले लेते हैं, कभी काम आ गई तो ठीक। लेकिन जब असली में जरूरत पड़ी, तो ये पॉलिसी ही सिरदर्द बन गई।
दिल्ली के एक टेक प्रोफेशनल ने फ्लाइट टिकट के साथ ऐसी ही इंश्योरेंस पॉलिसी ली थी। उनकी फ्लाइट करीब तीन घंटे लेट हो गई। उन्होंने सोचा कि चलो, अब क्लेम कर लेते हैं। लेकिन इसके बाद शुरू हुआ असली झंझट।
क्लेम करना बना टेढ़ी खीर

सबसे पहले तो एयरलाइन की ऐप में क्लेम करने का कोई सीधा ऑप्शन ही नहीं मिला। कस्टमर सपोर्ट ने कहा – “ईमेल चेक कीजिए।” ईमेल में एक लिंक था, जिसे क्लिक करने पर एक नया पोर्टल खुला। उस पोर्टल ने कहा – “पहले हमारा ऐप डाउनलोड करो।”
ऐप डाउनलोड करने के बाद भी कोई सीधा तरीका नहीं मिला जिससे क्लेम फाइल किया जा सके। अलग-अलग जगह पर भेजा गया, बार-बार वही जानकारी भरने को कहा गया और हर बार एक नई शर्त सामने आ गई।
क्या सीखा इससे?
सिर्फ ₹249 की पॉलिसी सस्ती जरूर लगी, लेकिन जब उसे इस्तेमाल करने का मौका आया, तो यह फायदे की बजाय समय और एनर्जी की बर्बादी बन गई। इसलिए अगली बार कोई भी इंश्योरेंस लेने से पहले एक बार जरूर जांचें कि उसका प्रोसेस कितना आसान है और क्या वह सच में भरोसे लायक है।


