देश की अर्थव्यवस्था के लिहाज से एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। जून 2025 में भारत की थोक महंगाई दर घटकर सिर्फ 0.13% रह गई, जो अक्टूबर 2023 के बाद से अब तक की सबसे कम दर है। मई में भी थोक महंगाई 0.39% रही थी। लगातार दूसरे महीने थोक महंगाई में गिरावट देखी गई है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण खाद्य वस्तुओं, खनिज तेलों और धातुओं की कीमतों में कमी है।
क्या रहा प्रमुख कारण?
औद्योगिक मंत्रालय के अनुसार, जून महीने में जिन वस्तुओं की कीमतें सबसे ज्यादा गिरीं, वे हैं:
खाद्य पदार्थ: जून में इनमें 3.75% की गिरावट, जबकि मई में 1.56% की गिरावट देखी गई थी।
सब्जियां: 22.65% तक सस्ती हो गईं, जबकि मई में 21.62% सस्ती हुई थीं।
ईंधन और बिजली: इनकी महंगाई दर जून में 2.65% रही, जो मई में 2.27% थी।
विनिर्मित उत्पाद: जिनका थोक महंगाई में 60% से ज्यादा योगदान होता है, उनकी मुद्रास्फीति 1.97% रही, जो मई में 2.04% थी।
प्राथमिक वस्तुएं भी सस्ती हुईं

जिन वस्तुओं को उत्पादन की बुनियाद माना जाता है यानी कच्चे माल जैसे धातु, खनिज, पेट्रोलियम आदि — उनकी महंगाई दर भी जून में घटकर 3.38% हो गई है। यह मई में 2.02% थी।
आगे क्या असर पड़ेगा?
थोक मूल्य सूचकांक (WPI) पर नजर रखने से यह अंदाजा मिलता है कि बाजार में सप्लाई चेन कैसी स्थिति में है और कंपनियों के लिए लागत कितनी बदल रही है। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अपनी मौद्रिक नीति बनाते समय खुदरा महंगाई (CPI) को प्राथमिकता देता है।
RBI ने पिछले महीने महंगाई के दबाव में कमी को देखते हुए नीतिगत ब्याज दर में 0.50% की कटौती की थी, जिससे यह 5.50% पर आ गई है।
अब बाजार और निवेशक खुदरा महंगाई दर के आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं, जो आज दोपहर तक जारी किए जाएंगे।
थोक महंगाई में गिरावट आम उपभोक्ताओं और कारोबारियों — दोनों के लिए राहत भरी है। इससे आने वाले महीनों में महंगाई पर नियंत्रण और ब्याज दरों में और नरमी की उम्मीद की जा सकती है।


